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राजकीय शिक्षक संघ कुमाऊ मण्डल के चुनाव में डॉ गोकुल सिंह मर्तोलिया बने अध्यक्ष

राजकीय शिक्षक संघ कुमाऊ मण्डल के चुनाव 18 अगस्त 2023 को हल्द्वानी में सफलतापूर्वक आयोजित हुए। इस चुनाव में कुल 24 प्रत्याशियों ने विभिन्न पदों के लिए नामांकन किया था। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पद था अध्यक्ष का, जिसके लिए प्रमुख प्रत्याशियों में से डॉ गोकुल सिंह मर्तोलिया और डॉ कन्नू जोशी आमने-सामने आए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह चुनाव शिक्षक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मोर्चा था, क्योंकि यह उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति एक मजबूत संदेश भी देता है। इसके साथ ही, यह चुनाव उन नेताओं की पहचान का भी माध्यम था, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति के लिए अपना समर्पण दिखाया है।

चुनाव के परिणामों के अनुसार, डॉ गोकुल सिंह मर्तोलिया ने अध्यक्ष पद के लिए 690 मत प्राप्त करके विजय हासिल की। उनके प्रतिद्वंदी डॉ कन्नू जोशी ने 449 मतों के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया।

मतदान के बाद अध्यक्ष डॉ मर्तोलिया ने विजय के बाद उद्घाटन भाषण में कहा, “मैं इस जीत को समझता हूँ कि यह शिक्षक समुदाय के आत्म-सम्मान की एक बड़ी जीत है। हम शिक्षकों का दायित्व है कि हम अपने छात्रों को समर्पित और नैतिक नागरिक बनाने का कार्य करें।”

इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नई नीतियों की आवश्यकता पर भी बल दिया और सरकार से मांग की कि वे शिक्षा को और भी मजबूती दें और शिक्षकों को उनके कार्यों के लिए समर्थन प्रदान करें।

इस चुनाव में महत्वपूर्ण पदों पर चयनित अन्य प्रत्याशियों में मंत्री श्री रविशंकर गुसाईं ने 618 मतों के साथ मंत्री पद की जीत हासिल की। उनके प्रतिद्वंदी डॉ कैलाश डोलिया ने 353 मतों के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

चुनाव के अन्य पदों पर भी यथाशक्ति वोटिंग हुई और संगठन मंत्री, संयुक्त मंत्री, उपाध्यक्ष, और आय-व्यय निरीक्षक के पदों पर विजयी प्रत्याशियों का चयन हुआ।

डॉ मर्तोलिया ने सभी शिक्षकों को बहुत आशा दिलाई है कि वे शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा, “हम सभी मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने का काम करेंगे और शिक्षकों को उनके कार्यों के लिए पूरी सहायता और समर्थन प्रदान करेंगे। हम एक योग्य और कुशल नेतृत्व सम्पन्न संगठन बनाएंगे।”

यह चुनाव शिक्षक समुदाय के लिए एक नई शुरुआत का संकेत हो सकता है, जो उनके अधिकारों की प्रतिष्ठा को बढ़ावा देते हुए उनके कौशल और योग्यता को महत्वपूर्ण बनाता है। इससे न सिर्फ शिक्षकों की बल्कि छात्रों की शिक्षा को भी एक नया दिशा-निर्देश मिल सकता है।

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