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Ayushman Bharat-Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PMJAY): CAG Audit Report से उजागर हुई अनियमितताएँ

Ayushman Bharat-Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PMJAY)आयुष्मान भारत-पीएमजेआई क्या है? :

परिचय:

पीएमजेआई विश्व की सबसे बड़ी सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसे फरवरी 2018 में शुरू किया गया, जिसमें परिवार को चिकित्सा देखभाल के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। PMJAY के तहत लाभार्थी का चयन सरकारी नैतिकता के आधार पर होता है, जिसमें गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को प्राथमिकता दी जाती है।

स्वास्थ्य सेवाएँ:

PMJAY के तहत प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाएँ बहुत विस्तृत हैं, जिनमें अस्पतालीय चिकित्सा, अस्पताल में भर्ती के लिए अनुदान, गर्भावस्था देखभाल, बाल, यौन स्वास्थ्य, और निगरानी शामिल है।

भारत के नियंत्रक और महालेखा-परीक्षक (Comptroller and Auditor-General of India- CAG) की हाल ही में प्रकाशित ऑडिट रिपोर्ट में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat-Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana- PMJAY) में हुई अनियमितताओं को उजागर किया गया है। यह योजना भारत के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चलने वाली प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना है।

CAG रिपोर्ट द्वारा उजागर किए गए मुद्दे:

मृत मरीजों का उपचार:

चौंकाने वाले इन आंकणों में उन मरीजों का उपचार जारी रहा जिन्हें पहले से “मृत” घोषित किया गया था। इस प्रकार के मामले सबसे अधिक छत्तीसगढ़, हरियाणा, और झारखंड में रिपोर्ट हुए, जबकि सबसे कम अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, और चंडीगढ़ में थे। इसमें निर्दिष्ट उपचार के दौरान 88,760 रोगियों की मृत्यु हो गई थी, फिर भी इससे जुड़े कुल 2,14,923 दावों को सिस्टम में दर्शाया गया है।

गलत घरेलू आकार:

कुछ मामलों में, पंजीकृत घरों का आकार असामान्य रूप से बड़ा पाया गया, जैसे 11 से 200 सदस्यों तक का आकार था। ऐसी विसंगतियाँ पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान उचित सत्यापन की कमी का संकेत देती हैं।

योजना से पेंशनभोगी को लाभ:

कुछ राज्यों में, पेंशन भोगियों को भी PMJAY कार्ड जारी किए गए और उन्हें भी इस योजना के तहत उपचार का लाभ मिल रहा था। अपात्र लाभार्थियों को हटाने में देरी से की गई कार्रवाई के कारण, अपात्र व्यक्तियों को PMJAY के तहत उपचार का लाभ प्राप्त हुआ।

फर्जी मोबाइल नंबर और आधार:

रिपोर्ट से पता चला कि कई लाभार्थियों को एक ही फर्जी मोबाइल नंबर के साथ पंजीकृत किया गया था, जिससे संभावित रूप से सत्यापन प्रक्रिया में समझौता अथवा हेराफेरी की गई थी। इसी तरह कुछ आधार नंबरों को कई लाभार्थियों के साथ जोड़ा गया था, जिससे सही सत्यापन पर सवाल उठ रहे थे।

प्रणालीकृत विफलताएँ:

CAG की रिपोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों को सार्वजनिक चिकित्सालय के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा नहीं करने, संरचनात्मक अपर्याप्तताओं, उपकरण की कमी, और चिकित्सा दोषों जैसी अनियमितताओं को प्रकाशित किया है। अपर्याप्त सत्यापन- गलत नाम, गलत जन्म तिथियाँ, और नकली PMJAY आईडी को भी रिपोर्ट में उजागर किया गया है। कई राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के सूचीबद्ध अस्पतालों में गैर-कार्यक्षम उपकरण भी पाए गए हैं।

बकाया कर्ज:

रिपोर्ट ने 9 राज्यों में 100 अस्पतालों के खिलाफ ₹12.32 करोड़ (1.65 मिलियन डॉलर) के बकाया कर्ज का पर्दाफाश किया है।

योजना में डेटा संग्रहण:

कुछ मामलों में, स्थानीय स्तर के कर्मचारियों द्वारा यादृच्छिक दस अंकों की संख्याएँ दर्ज किए जाने का अंदेशा  हैं, जिससे डेटा की सत्यता को बाधित हो सकती है।

इसके साथ ही, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने अपने आईटी पोर्टल में सुधार किए हैं ताकि पहले से उपलब्ध वैध मोबाइल नंबर का उपयोग सत्यापन के उद्देश्यों के लिए किया जा सके।

सरकार के प्रमाणन प्रयास:

मोबाइल नंबर और सत्यापन: स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि लाभार्थी सत्यापन के लिए मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं होता है। इस योजना में मुख्य रूप से पहचान के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी का उपयोग करती है| NHA ने सत्यापन के विभिन्न विकल्प प्रदान किए हैं, जिनमें उंगलियों की छाप, आईरिस स्कैन, चेहरे की पहचान, और OTP सत्यापन शामिल हैं।

उंगली की छाप के आधार पर सत्यापन करने की प्रक्रिया आमतौर पर सभी हितकारी योजना में प्रयुक्त होती है, जिससे सही लाभार्थी पहचान हो सके।

निष्कर्ष:

CAG की रिपोर्ट के आधार पर, PMJAY में अनियमितताएँ उजागर होने का पता चलता है जो इसकी प्रभावी प्रबंधन और सत्यापन प्रक्रिया की आवश्यकता को दर्शाती है। सरकार को इसे सुधारने के लिए विस्तृत विवेचन  और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि सभी योजना के लाभार्थियों को सही समय पर सही उपचार प्राप्त हो सके।


FAQ

1. पीएमजेआई क्या है?

पीएमजेआई भारतीय स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका शुरुआती नाम आयुष्मान भारत योजना है। यह भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य बीमा योजना है जिसका उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करके प्राथमिक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल की पहुँच सुनिश्चित करना है।

2. सीएजी ऑडिट रिपोर्ट में क्या उजागर हुई अनियमितताएँ हैं?

सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार पीएमजेआई में कई अनियमितताएँ उजागर हुई हैं। इनमें मृत मरीजों का उपचार के दौरान अनियमितताएँ, गलत घरेलू आकार के पंजीकरण, पेंशनभोगियों को योजना का लाभ देना, फर्जी मोबाइल नंबर और आधार का इस्तेमाल, प्रणाली में विफलताएँ, बकाया कर्ज आदि शामिल हैं।

3. किन राज्यों में मृत मरीजों के उपचार में अनियमितताएँ हुई हैं?

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार मृत मरीजों के उपचार के दौरान अनियमितताएँ सबसे अधिक छत्तीसगढ़, हरियाणा, और झारखंड में दर्ज की गई हैं। इसके बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, और चंडीगढ़ आते हैं।

4. कैसे पता चलता है कि गलत घरों का आकार बड़ा पाया गया है?

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में पंजीकृत घरों का आकार असामान्य रूप से बड़ा पाया गया था, जैसे 11 से 200 सदस्यों तक का आकार था। यह विसंगतियाँ पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान उचित सत्यापन की कमी का संकेत देती हैं।

5. क्या पेंशनभोगियों को भी पीएमजेआई का लाभ मिला है?

हां, कुछ राज्यों में पेंशनभोगियों को भी पीएमजेआई कार्ड जारी किए गए और उन्हें भी योजना के तहत उपचार का लाभ मिल रहा था। हालांकि अपात्र लाभार्थियों को पहचानने में कुछ कठिनाइयों की वजह से, उन्हें लाभ प्राप्त करने में देरी हुई।

6. कैसे फर्जी मोबाइल नंबर और आधार का इस्तेमाल हुआ है?

रिपोर्ट से पता चलता है कि कई लाभार्थियों को एक ही फर्जी मोबाइल नंबर के साथ पंजीकृत किया गया था, जिससे संभावित रूप से सत्यापन प्रक्रिया में समझौता या हेरफेरी की गई थी। कुछ आधार नंबरों को भी कई लाभार्थियों के साथ जोड़ा गया था, जिससे सत्यापन की सवालियाँ उठी।

7. पीएमजेआई में प्रणाली में विफलताएँ क्या हैं?

सीएजी की रिपोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों को सार्वजनिक चिकित्सालयों के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं को पूरा नहीं करने, संरचनात्मक अपर्याप्तताओं, उपकरण की कमी, और चिकित्सा दोषों जैसी अनियमितताएँ उजागर की है।

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